EPISODE · Jan 9, 2026 · 2 MIN
Dheere Bahut Dheere Chhoot Jaata hai Sab | Adiba Khanum
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
धीरे बहुत धीरे छूट जाता है सब । अदीबा ख़ानमधीरे, बहुत धीरे छूट जाता है सब अपना घरअपने लोगअपना मनअपना जीवनजिए हुए के प्रति प्रेमआने वाले के प्रति ईमानदारीअपनी इच्छाएँ और उम्मीदें धरती की हरी घास का मोहमिटटी की कच्ची सुगंध का पाशहिलते हुएपीले परदों से झँकती रौशनी चाँद की कीमती ठंडकसितारों की चमकऔर रात के आसमान की नीली रोशनाईनहरों का गंदला पानीनदियों की बेख़ौफ़ दौड़समुद्र का अथाह वितानब्रहमांड की निर्जन हूकनहीं!कभी नहीं छूटती अपनी धरतीअपनी धरती पर बसे हमहम, खुद से कभी नहीं छूटतेसाथ रहता है अपना आकाशआकाश को घेरे काले बादलआकाश का फिरोज़ी अपनापनआकाश की-सी खूली दुनियाआकाश का अनंत कभी नहीं छूटतान छूटे मुझसे या किसी सेउसका आकाश!!
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