EPISODE · May 9, 2024 · 1 MIN
Dhoop | Roopa Singh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
धूप | रूपा सिंहधूप!!धधकती, कौंधती, खिलखिलातीअंधेरों को चीरती, रौशन करती।मेरी उम्र भी एक धूप थीअपनी ठण्डी हड्डियों को सेंका करते थे जिसमें तुम!मेरी आत्मा अब भी एक धूपअपनी बूढ़ी हड्डियों को गरमाती हूँ जिसमें।यह धूप उतार दूँगी,अपने बच्चों के सीने मेंताकि ठण्डी हड्डियों वाली नस्लेंइस जहाँ से ही ख़त्म हो जाएँ।
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Dhoop | Roopa Singh
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