Dopahar Ki Kahaniyon Ke Mama | Rajesh Joshi episode artwork

EPISODE · Mar 24, 2025 · 2 MIN

Dopahar Ki Kahaniyon Ke Mama | Rajesh Joshi

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

दोपहर की कहानियों के मामा | राजेश जोशी हम उन नटखट बच्चियों के मामा थेजो अकसर दोपहर में अपनी नानियों से कहानी सुनने की ज़िद करती थीहम हमेशा ही घर लौटने के रास्ते भूल जाते थेघर के एकदम पास पहुँचकर मुड़ जाते थेकिसी अपरिचित गली मेंअकेले होने से हमें डर लगता थाऔर लोगों के बीच अचानक ही हम अकेले हो जाते थेअर्जियों के साथ हमारा जो जीवन चरित नत्थी थाउसमें हमारे अनुभवों के लिए कोई जगह नहीं थीउसमें चाय की दुकानों और सिगरेट की गुमटियों केहमारे उधार खातों का जिक्र नहीं थाउसमें हमारे रतजगों और आवारगी का कोई किस्सा नहीं थाकई पेड़ों, खंडहरों और चट्टानों पर लिख आए थे हम अपने नामप्रेमिकाओं को अकसर हम जीवन से जाते हुए देखते थेमोची हमारी चप्पलों को देखकर पहले मुस्कुराते थेफिर नए थेगले लगाने से इनकार कर देते थेहम अपनी खाली जेबों में डाले रहते थे अपने खाली हाथएक खालीपन को दूसरे खालीपन से भरते हुएहमें लेकिन एक हुनर में महारत हासिल थीहम बहुत सफाई से अपनी हँंसी में अपने आँसू छिपा लेते थे।

दोपहर की कहानियों के मामा | राजेश जोशी हम उन नटखट बच्चियों के मामा थेजो अकसर दोपहर में अपनी नानियों से कहानी सुनने की ज़िद करती थीहम हमेशा ही घर लौटने के रास्ते भूल जाते थेघर के एकदम पास पहुँचकर मुड़ जाते थेकिसी अपरिचित गली मेंअकेले होने से हमें डर लगता थाऔर लोगों के बीच अचानक ही हम अकेले हो जाते थेअर्जियों के साथ हमारा जो जीवन चरित नत्थी थाउसमें हमारे अनुभवों के लिए कोई जगह नहीं थीउसमें चाय की दुकानों और सिगरेट की गुमटियों केहमारे उधार खातों का जिक्र नहीं थाउसमें हमारे रतजगों और आवारगी का कोई किस्सा नहीं थाकई पेड़ों, खंडहरों और चट्टानों पर लिख आए थे हम अपने नामप्रेमिकाओं को अकसर हम जीवन से जाते हुए देखते थेमोची हमारी चप्पलों को देखकर पहले मुस्कुराते थेफिर नए थेगले लगाने से इनकार कर देते थेहम अपनी खाली जेबों में डाले रहते थे अपने खाली हाथएक खालीपन को दूसरे खालीपन से भरते हुएहमें लेकिन एक हुनर में महारत हासिल थीहम बहुत सफाई से अपनी हँंसी में अपने आँसू छिपा लेते थे।

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Dopahar Ki Kahaniyon Ke Mama | Rajesh Joshi

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How long is this episode of Pratidin Ek Kavita?

This episode is 2 minutes long.

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This episode was published on March 24, 2025.

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दोपहर की कहानियों के मामा | राजेश जोशी हम उन नटखट बच्चियों के मामा थेजो अकसर दोपहर में अपनी नानियों से कहानी सुनने की ज़िद करती थीहम हमेशा ही घर लौटने के रास्ते भूल जाते थेघर के एकदम पास पहुँचकर मुड़ जाते थेकिसी अपरिचित गली मेंअकेले होने से हमें डर...

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