EPISODE · Jan 17, 2026 · 2 MIN
Dushwari | Javed Akhtar
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
दुश्वारी। जावेद अख़्तरमैं भूल जाऊँ तुम्हेंअब यही मुनासिब हैमगर भुलाना भी चाहूँ तो किस तरह भूलूँकि तुम तो फिर भी हक़ीक़त होकोई ख़्वाब नहींयहाँ तो दिल का ये आलम है क्या कहूँकम-बख़्तभुला न पाया वो सिलसिलाजो था ही नहींवो इक ख़यालजो आवाज़ तक गया ही नहींवो एक बातजो मैं कह नहीं सका तुम सेवो एक रब्तजो हम में कभी रहा ही नहींमुझे है याद वो सबजो कभी हुआ ही नहीं
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Dushwari | Javed Akhtar
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