EPISODE · Mar 5, 2024 · 4 MIN
Ek Ashwasti - Halki Phulki | Prem Vats
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
एक आश्वस्ति - हल्की फुलकी | प्रेम वत्स एक हल्का घुला हुआ गुलाबीपनपंखुरियों की भाँति चिपक-सा जाता हैउसके हल्के रोंयेदार गालों के दोनों उट्ठलों सेजो हल्का-सा भी अप्रत्याशित होने परउठ खड़े होते हैं खरगोशी कान जैसेप्रेम में अक्सरउसे भी तुम प्रेम ही कहोजब वह अपनी ठुड्ढी पर तड़के आएहल्के नर्म बालों को वजह-बेवजहअपनी उंगलियों से पुचकारता रहता हैऔर ख़यालों में खोए उस महाशय सेजब तुम कुछ पूछते हो तो वह फिर से नापने लगता हैउन दाढ़ियों को इंच-दर-इंचजिन्हें अब तक दाढ़ी कह पाना भीएक अतिशयोक्ति हैवह हताश होकर खट्ट-से बैठ जाता हैगौर करो इतनी जोर की हताशाउसे कभी नहीं आईयह उतनी ही जोर की हैजितनी जोर की हँसी छूटी थी उसकीकलप-कलप के रोने के घंटों बाद उस रोजवह आज भी प्रेम में है...इसलिए अपनी भावनाओं कोस्पर्श कर सकने कीसबसे निकटतम दूरी पर हैऔर शायद इसलिएहर्ष और विषाद के उन क्षणों मेंवह सबसे कुशल अभिव्यंजक होता हैइतना कुशल कि आँसूओं के आगेजो तुम रखते हो कोरा कागजतो रच जाता है अनंत सर्गों का महाकाव्यऔर उसके अट्टहासों और चित्कारों परजब तुम कान धरते होतो सुन पाते होअपनी सदी के सबसे मधुरतम संगीत कोप्रेम में उसके विलापउतने ही कर्णप्रिया होते हैंजितने ज्यादा कर्कशतुम्हारे कौमी रक्षक नेताओं केबहिष्कारी प्रवचन तुम्हें लगते हैंतुमने उसके चेहरे कीअस्पष्ट भंगिमाएं देखीं हैंउनमें कितनी अपार संभावनाएं हैंअर्थ को बहुलता प्रदान करने कीतुम्हारे पर्दे पर का सर्वश्रेष्ठ नायक भीअब एक आयामी अभिनय करने लगा हैतुमने गौर किया है इस बात पर?उसकी मुद्राओं से बहकर गिरता है शृंगारजब-जब भी वह स्पर्श करता हैतुम्हारे अंतःस्थल के भी निचले तल कोकितने सत्-चित्त-आनंद कीआमद होती है तुममेंतुमने टटोला है खुद कोइस धरा पर अपने सबसे ज्यादामत्त हुए क्षणों मेंतुम उन अप्रत्याशित क्षणों मेंएकदम बेडौल-से लगते होकोई चीन्हा-पहचाना भी तुम्हेंअनचीन्हा बता जायेगाइतने वीभत्स दिखते हो तुमक्या उन क्षणों में तुमने अपने अधरों परशहद जैसा कुछ महसूस किया है?वह.. वही है..तुम्हारे सबसे अनाकर्षकपर सबसे ज्यादा मानवीय गंध मेंतुम्हें सब से अधिकअपनी साँसों में भर लेने वाला.प्रेम में अक्सरअप्रत्याशा ही हाथ लगती हैजब भी प्रेमअपने गर्भावस्था में पक रहा होता हैदो नाज़ुक शावकों के बीचजो वयोवृद्ध होने की कगार पर हैंपर उन क्षणों के लिए बने रहते हैंजगत के सबसे प्रियतम जोड़ेजैसे इस क्षण के लिएएक तुम हो और एक वह... देखो वह अब भीअपनी ठुड्ढी के बालों को सहला रहा हैदेखो उसके गालों के दो उट्ठलों मेंफंसे गुलाबीपन कोकिसी के तुम्हारे प्रेम में होने काइससे ज्यादा क्या प्रमाण चाहिए तुम्हें!
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