EPISODE · May 27, 2024 · 2 MIN
Ek Avishwasniya Sapna | Vishwanath Prasad Tiwari
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
एक अविश्वसनीय सपना - विश्वनाथ प्रसाद तिवारीएक दिन उसने सपना देखाबिना वीसा बिना पासपोर्टसारी दुनिया में घूम रहा है वहन कोई सरहद, न कोई चेकपोस्टसमुद्रों और पहाड़ों और नदियों और जंगलों सेगुज़रते हुए उसने अद्भुत दृश्य देखे...आकाश के, बादलों और रंगों के...अक्षत यौवना प्रकृति उसके सामने थी...निर्भय घूम रहे थे पशु पक्षी।पुरुष स्त्री बच्चे क्या शहर थे वे और कैसे गाँवकोई राजा कोई सिपाहीकोई जेल कोई बन्दूक नहींचारों ओर खिले हुए चेहरेऔर उगते हुए अँखुएऔर उड़ती हुई तितलियाँ उसे अचरज हुआउसे सपने में भी लगा यह सपना हैतभी एक धमाका हुआ ज़ोर काएक तानाशाह की तलवार चमकी वह काँपता हुआ उठ बैठा अब वह फिर कोशिश कर रहा थाउसी सपने में लौटने की।
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