EPISODE · Aug 28, 2024 · 2 MIN
Ek Baar Jo | Ashok Vajpeyi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
एक बार जो | अशोक वाजपेयी एक बार जो ढल जाएँगेशायद ही फिर खिल पाएँगे।फूल शब्द या प्रेमपंख स्वप्न या यादजीवन से जब छूट गए तोफिर न वापस आएँगे।अभी बचाने या सहेजने का अवसर हैअभी बैठकर साथगीत गाने का क्षण है।अभी मृत्यु से दाँव लगाकरसमय जीत जाने का क्षण है।कुम्हलाने के बादझुलसकर ढह जाने के बादफिर बैठ पछताएँगे।एक बार जो ढल जाएँगेशायद ही फिर खिल पाएँगे।
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Ek Baar Jo | Ashok Vajpeyi
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