Ek Bijooke Ki Prem Kahani | Anamika episode artwork

EPISODE · Dec 20, 2025 · 4 MIN

Ek Bijooke Ki Prem Kahani | Anamika

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

एक बिजूके की प्रेम कहानी | अनामिका मैं हूँ बिजूका एक ऐसे खेत काजिसमें सालों से कुछ नहीं उगाबेकार पड़ा पड़ा धसक गया है मेरा हाड़ी सा गोल गोल माथा, उखड़ गई हैं मूँछें लचक गए हैं कंधेएक तरफ़ झूल गया है कुर्ता कुर्ते की जेबी में चुटुर- पुटुर करती है लेकिन नीले पीले पंखों वाली इक छोटी-सी चिड़ियाएक वक़्त था जब यह चिड़िया मुझ से बहुत डरती थीधीरे-धीरे उसका डर निकल गयाकल मेरी जेबी में अंडे दिए उसने मेरे भरोसे ही उन्हें छोड़ कर जाती है वह दाना लानेबहुत दूरनया नया है मेरी ख़ातिर भरोसे का कोमल एहसासकाठ के कलेजे में मेरे बजने लगा है इकतारादूर तलक है उजाड़ मगर यह जो चटकने चमकने लगी है बूटी भरोसे कीउसकी ही मूक प्रार्थना फूली है शायद कि बदलियाँ उमड़ आई हैं अचानकखिल जाएंगी बूटियाँ अब तोबस जाएगा फिर से यह उजड़ा दयारलेकिन जब खेत हरे हो जाएँगेमुझको फिर से भयावह बना देंगे खेतों के मालिकहाड़ी मुख पर मेरे कोलतार पोतेंगेलाल नेल पॉलिश से आँखें बनाएँगी ख़ून टपकती हुई, मक्के के मूंछों पर लस्सा लगाकर मुझे बनाएंगे ख़ूब कड़क ढह जाएगी तब तो मेरी निरीहता जब मैं भयावह हो जाऊंगा फिर से डर जाएगी मेरी चिड़िया मुझी से और दूर उड़ जाएगी सदा के लिए क्या बेबसी प्यार का घर हैप्यार हमदर्द नगर है?

एक बिजूके की प्रेम कहानी | अनामिका मैं हूँ बिजूका एक ऐसे खेत काजिसमें सालों से कुछ नहीं उगाबेकार पड़ा पड़ा धसक गया है मेरा हाड़ी सा गोल गोल माथा, उखड़ गई हैं मूँछें लचक गए हैं कंधेएक तरफ़ झूल गया है कुर्ता कुर्ते की जेबी में चुटुर- पुटुर करती है लेकिन नीले पीले पंखों वाली इक छोटी-सी चिड़ियाएक वक़्त था जब यह चिड़िया मुझ से बहुत डरती थीधीरे-धीरे उसका डर निकल गयाकल मेरी जेबी में अंडे दिए उसने मेरे भरोसे ही उन्हें छोड़ कर जाती है वह दाना लानेबहुत दूरनया नया है मेरी ख़ातिर भरोसे का कोमल एहसासकाठ के कलेजे में मेरे बजने लगा है इकतारादूर तलक है उजाड़ मगर यह जो चटकने चमकने लगी है बूटी भरोसे कीउसकी ही मूक प्रार्थना फूली है शायद कि बदलियाँ उमड़ आई हैं अचानकखिल जाएंगी बूटियाँ अब तोबस जाएगा फिर से यह उजड़ा दयारलेकिन जब खेत हरे हो जाएँगेमुझको फिर से भयावह बना देंगे खेतों के मालिकहाड़ी मुख पर मेरे कोलतार पोतेंगेलाल नेल पॉलिश से आँखें बनाएँगी ख़ून टपकती हुई, मक्के के मूंछों पर लस्सा लगाकर मुझे बनाएंगे ख़ूब कड़क ढह जाएगी तब तो मेरी निरीहता जब मैं भयावह हो जाऊंगा फिर से डर जाएगी मेरी चिड़िया मुझी से और दूर उड़ जाएगी सदा के लिए क्या बेबसी प्यार का घर हैप्यार हमदर्द नगर है?

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How long is this episode of Pratidin Ek Kavita?

This episode is 4 minutes long.

When was this Pratidin Ek Kavita episode published?

This episode was published on December 20, 2025.

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एक बिजूके की प्रेम कहानी | अनामिका मैं हूँ बिजूका एक ऐसे खेत काजिसमें सालों से कुछ नहीं उगाबेकार पड़ा पड़ा धसक गया है मेरा हाड़ी सा गोल गोल माथा, उखड़ गई हैं मूँछें लचक गए हैं कंधेएक तरफ़ झूल गया है कुर्ता कुर्ते की जेबी में चुटुर- पुटुर करती है...

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