EPISODE · Jun 7, 2024 · 1 MIN
Filhaal | Uday Prakash
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
फ़िलहाल | उदय प्रकाश एक गत्ते का आदमीबन गया था लौहपुरुषबलात्कारी हो चुका था सन्तव्यभिचारी विद्वानचापलूस क्रान्तिकारीमदारी को घोषित कर दिया गया थायुग-प्रवर्तकअख़बार और चैनलचीख़-चीख़ कर कह रहे थेआ गयी है सच्ची जम्हूरियतजहाँ सबसे ज्यादा लाशें बिछी थींवहीं हो रहा था विकासजो बैठा था किसी उजड़े पेड़ के नीचेपढ़ते हुए अकेले मेंकोई बहुत पुरानी किताबवही था सन्दिग्धउसकी हो रही थी लगातारनिगरानी
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