EPISODE · Jan 24, 2024 · 2 MIN
Gawaiyya | Shahanshah Alam
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
गवैया | शहंशाह आलम गवैया अपनी पीड़ा को पूरी लय के साथ गाता हैआज वह न दुःख को बाँधता है न उदासी कोन धूप को न बादल को न अपनी आत्मा कोगवैया सेतु को गाता है उसके नीचे बहते जल को गाता हैरंग को गाता है शहद को गाता है नमक को गाता हैमहुआ को गाता है जामुन को गाता है नीम को गाता हैगवैया अपनी धुन की गति और उतार-चढ़ाव मेंगायन की शैली में बस अपने समय को गाता हैसमय का यह रूपक किसका है जो दुःख से भरा है।
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