EPISODE · Mar 16, 2026 · 2 MIN
Ghar | Mohan Rana
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
घर | मोहन राणाधन्य धरती है जिसकी करुणा अक्षतधन्य समुंदर जिसका नमक फीका नहीं होताधन्य आकाश जो रहता हमेशा मेरे साथ हर जगह दिन रातधन्य वे बीज जो पतझर को नहीं भूलतेधन्य वे शब्द भूलते नहीं जो चौखट पर कभी बाट लगाते दुखउसकी स्मृति कोधन्य उस विचार पहिए पर टँकी छवियाँजो बन जाती टॉकीज़,आकाशगंगा के छोर चुपचाप परिक्रमा मेंधन्य यह साँस,मैं कैसे भूल सकता हूँ घरऔर कोने पर धारे का पानी
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