EPISODE · Aug 8, 2025 · 1 MIN
Gumshuda Guldaste | Adnan Kafeel Darwesh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
गुमशुदा गुलदस्ते | अदनान कफ़ील दरवेश कुछ पेड़ हैं वहाँपानी की तरह ठोसऔर हवा की तरह नर्मऔर आसमान-से हल्के-गुलाबीफूल उनमें खिलतेकाँटों-से बेशुमारदहकते शोलों-सेदूर से चमकते...कच्चे रास्तेइशारों-से नाज़ुकझुके चले आते मेरी तरफ़जहाँ तुम्हारी यादों केगुमशुदा गुलदस्तेढूँढ़ते हैं मेरे पाँव...इन तुर्श अँधेरों मेंअपनी खोई उम्र को सोचताभटकता हूँजहाँ बर्फ़ से भी तेज़ गल जाती हैं यादें..
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