EPISODE · Jun 13, 2026 · 2 MIN
Hatheli Ki Lakeerein | Madhav Kaushik
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
हथेली की लकीरें । माधव कौशिकचले तो साथ थे लेकिन न जाने कैसे हुआतुम्हारा हाथ किसी पिछले जन्म में शायद हमारे हाथ से छूटा तो छूटता ही गया हज़ारों साल से बिछड़ी हुई हैं दो आँखेंहज़ारों साल में जाकर कभी मिलें तो मिलेंकोई सुराग़ नहीं है इसीलिए शायदहथेलियों की लकीरों में ढूंँढता हूँ तुझे
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हथेली की लकीरें । माधव कौशिक चले तो साथ थे लेकिन न जाने कैसे हुआ तुम्हारा हाथ किसी पिछले जन्म में शायद हमारे हाथ से छूटा तो छूटता ही गया हज़ारों साल से बिछड़ी हुई हैं दो आँखें हज़ारों साल में जाकर कभी मिलें तो मिलें कोई सुराग़ नहीं है इसीलिए शायद हथेलियों की लकीरों में ढूंँढता हूँ तुझे
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