EPISODE · Feb 9, 2025 · 1 MIN
Hatyare Kuch Nahi Bigaad Sakte | Chandrakant Devtale
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
हत्यारे कुछ नहीं बिगाड़ सकते/ चंद्रकांत देवतालेनाम मेरे लिएपेड़ से एक टूटा पत्ताहवा उसकी परवाह करेमेरे भीतर गड़ी दूसरी ही चीज़ेंपृथ्वी की गंध औरपुरखों की अस्थियाँ उनकी आँखों समेतमेरे मस्तिष्क में तैनातसंकेत नक्षत्रों के बताते जोनहीं की जा सकती सपनों की हत्यामैं नहीं ज़िंदातोड़ने कुर्सियाँजोड़ने हिसाबईज़ाद करने करिश्मे शैतानों केमैं हूँ उन असंख्य आँखों मेंजो भूखीएक फूल पौध की तरहज़िंदगी को पनपते देखने के लिएहत्यारे कुछ नहीं बिगाड़ सकतेवे नहीं जानते ठिकानेरहस्य सुंदरता के छिपेकहाँ-कहाँ।
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