EPISODE · Jun 19, 2026 · 3 MIN
Hey Meri Uttara | Ashutosh Sharma
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
हे मेरी उत्तरा! । आशुतोष शर्मामेरे शस्त्र की धारमयी रति कोतुम्हारी भाषा के वैराग्य ने छीन लिया थाहे मेरी उत्तरा!मेरे रण में जाने से पूर्वतुम्हारे ऑँचल का सतीत्वमुझे आगाह कर रहा थाएक भयंकर सामूहिक पाप के प्रतिमेरे मातुल की वंशी सेएक मौन भाप की ध्वनि आ रही थीगांडीव अपने चरण मुझसे दूर हटा रहा थाआधा सा लग रहा था पिता भीम का आश्वासनहै मेरी उत्तरा!तुम्हारे बाल वैधव्यता सेकुरुक्षेत्र के मंडप में होगा मेरा विवाहमैं यह जानता था किधर्मक्षेत्र मेरी शोणित के योगदान का आकांक्षी है।इतिहास मेरी वीरता का आनन्द लेना चाहता है।हे मेरी उत्तरा!हमारे प्रेम का साहित्यछंदबद्ध नहीं हैअसंकलित, अज्ञात कहींमेरे मस्तक की भांतिजयद्रथ के पैरों तलेया सेनापतियों के विजयी रथों के नीचेसिपाहियों के शर्वों साइतिहासहीन पड़ा हैगौरव करने वाली जातिर्यों का सचकलम का सौदा करने वाले घातियों ने खा लिया हैहे मेरी उत्तरा!चक्रवर्तियों की सभा मेंपासों से तुम्हारी नियति को न खेल जाए कोई राजवंशतुम्हारा दाव पर लग जानामेरे पौरुष पर घाव सा न लग जाएइसी चिन्ता का नाम महाभारत है।हे मेरी उत्तरा!अपने ललाट का सिन्दूरमेरे भीगे पीताम्बर से पोंछनासंभवतः तुम्हारी माँग की अरुणिमा में और वृदधि हो जायव मेरा बलिदान कहीं और गौरवशालीऔर पुकारूं मैं तुम्हेंनिर्जीव पड़े श्रृंगारों सेहे मेरी संगिनी!हे मेरी अर्धागिनी!हे मेरी वीरांगना!हे मेरी उत्तरा!हे मेरी उत्तरा!हे मेरी उत्तरा!
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