EPISODE · Oct 2, 2024 · 2 MIN
Hum Laut Jayenge | Shashiprabha Tiwari
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
हम लौट जाएंगे | शशिप्रभा तिवारीकितने रात जागकर हमने तुमने मिलकर सपना बुना था कभी इस नीम की डाल पर बैठ कभी उस मंदिर कंगूरे पर बैठ कभी तालाब के किनारे बैठ कभी कुएं के जगत पर बैठ बहुत सी कहानियां मैं सुनाती थी तुम्हें ताकि उन कहानियों में से कुछ अलग कहानी तुम लिख सकोऔर अपनी तकदीर बदल डालोकितने रात जागकर हमने तुमने मिलकर सपना बुना था साथ तुम्हारे हम भी दुनिया के रंग देख पाते! लेकिन, परंतु, और बहुत से सवालव्यवस्था-व्यवसाय!यूं छूट गईं, उन दिवारों परनाहक, भाग्य बदलने कीकोशिश में तुम रोज पिसती रहीं होंगी,अपना दुख छिपातीं होंगी कितने रात जागकर हमने तुमने मिलकर सपना बुना था बंद दरवाज़े केपीछे का सचकौन जान सकता है?हम तो संसार में खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही लौट जाएंगे।उस नीम की डाल को न देखेंगे!न उस बसेरे कोन उस बस्ती कोउजड़े हुए, लोग बसाए घर के उजड़ने का दर्द भला क्या महसूस करेंगे?कितने रात जागकर हमने तुमने मिलकर सपना बुना था।
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