EPISODE · Jan 26, 2026 · 2 MIN
Humein Bhool Jana Chahiye | Afzal Ahmed Sayyid
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
हमें भूल जाना चाहिए । अफ़ज़ाल अहमद सय्यदउस ईंट को भूल जाना चाहिएजिस के नीचे हमारे घर की चाबी हैजो एक ख़्वाब में टूट गयाहमें भूल जाना चाहिएउस बोसे को (बोसा: चुम्बन)जो मछली के काँटे की तरह हमारे गले में फँस गयाऔर नहीं निकलताउस ज़र्द रंग को भूल जाना चाहिएजो सूरज-मुखी से अलाहिदा दिया गयाजब हम अपनी दोपहर का बयान कर रहे थेहमें भूल जाना चाहिएउस आदमी कोजो अपने फ़ाक़े परलोहे की चादरें बिछाता हैउस लड़की को भूल जाना चाहिएजो वक़्त कोदवाओं की शीशों में बंद करती हैहमें भूल जाना चाहिएउस मलबे सेजिस का नाम दिल हैकिसी को ज़िंदा निकाला जा सकता हैहमें कुछ लफ़्ज़ों को बिल्कुल भूल जाना चाहिएमसलनबनी-नौ-ए-इंसान (बनी-नौ-ए-इंसान: मानव समष्टि)
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