EPISODE · Jun 15, 2026 · 2 MIN
Ibn-e-Insha | Swanand Kirkire
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
इब्ने इंशा । स्वानंद किरकिरेहम इंशा जी के चेले हैंहम जोगी हैं बैरागी हैंहम प्रीत प्रेम के प्यासे हैंहम फ़ितरत से अनुरागी हैंइंशा की लय पर लिखते हैंकुछ उनकी तरह ही दिखते हैंइंशा की तरह हम प्रेमी हैंइंशा की तरह हम बाग़ी हैंहै चाँद से अपना यारानाहै मन उसका आना-जानाजिस शै से हमारा दिल है लगावो चाँद-चाँद कहलाती हैहज़ारों रातें चाँद हज़ारहर शब है मोहब्बत का बाज़ारहम जीते हैं अजी ऐसे हीहमें चाँद लगन जो लागी हैइस शब का चाँद तो आधा हैइसे कम कह दें या ज़्यादा हैइस चाँद के आगे पूनम है?या आगे इसके अमासी है?हम अंधी शब में जी लेंगेहम मन में चाँद दरस लेंगेहम इंशा जी के चेले हैंहमें कविता गढ़नी आती हैइंशा जी, कविता जीवन है?या जीवन कविता है, कह दोये जो भी है इसे जी लो जी...जिसे जैसी समझ में आती हैबड़ा ध्यान लगा कर हमने सुनोजीवन की कविता बाँची हैअपने घर नौ मन तेल है जीअपने दर राधा नाची है।
What this episode covers
इब्ने इंशा । स्वानंद किरकिरेहम इंशा जी के चेले हैंहम जोगी हैं बैरागी हैंहम प्रीत प्रेम के प्यासे हैंहम फ़ितरत से अनुरागी हैंइंशा की लय पर लिखते हैंकुछ उनकी तरह ही दिखते हैंइंशा की तरह हम प्रेमी हैंइंशा की तरह हम बाग़ी हैंहै चाँद से अपना यारानाहै मन उसका आना-जानाजिस शै से हमारा दिल है लगावो चाँद-चाँद कहलाती हैहज़ारों रातें चाँद हज़ारहर शब है मोहब्बत का बाज़ारहम जीते हैं अजी ऐसे हीहमें चाँद लगन जो लागी हैइस शब का चाँद तो आधा हैइसे कम कह दें या ज़्यादा हैइस चाँद के आगे पूनम है?या आगे इसके अमासी है?हम अंधी शब में जी लेंगेहम मन में चाँद दरस लेंगेहम इंशा जी के चेले हैंहमें कविता गढ़नी आती हैइंशा जी, कविता जीवन है?या जीवन कविता है, कह दोये जो भी है इसे जी लो जी...जिसे जैसी समझ में आती हैबड़ा ध्यान लगा कर हमने सुनोजीवन की कविता बाँची हैअपने घर नौ मन तेल है जीअपने दर राधा नाची है।
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Ibn-e-Insha | Swanand Kirkire
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