EPISODE · Jun 12, 2024 · 2 MIN
Ik Roz Doodh Ne Ki Pani Se Paak Ulfat | Unknown
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
इक रोज़ दूध ने की पानी से पाक उल्फ़त | अज्ञात इक रोज़ दूध ने की, पानी से पाक उल्फ़तइक ज़ात हो गए वो, मिल-जुल के भाई भाईइनमें बढ़ी वो उल्फ़त, एक रंग हो गए वोएक दूसरे ने पाया, सौ जान से फ़िदाई हलवाई ने उनकी, उल्फ़त का राज़ समझा दोनों से भर के रक्खी, भट्टी पे जब कढ़ाई बरछी की तरह उट्ठे, शोले डराने वाले भाई रहे सलामत, पानी के दिल में आई ख़ामोश भाप बनकर, भाई से ली विदाई क्या पाक-दामनी थी, के जान भी गँवाई जब दूध ने ये देखा, उल्फ़त का जोश आया जब दूध ने ये देखा, उल्फ़त का जोश आया कहने लगा कहां है, वो जॉं निसार भाई अफ़सोस आग ने है, भाई मेरा जलाया मुझको न कहना भाई, जब तक न की चढ़ाई कहते ही बात इतनी, उसको जलाल आया कहते ही बात इतनी, उसको जलाल आया ऐसा उबल के झपटा, कि आग सब बुझाई हलवाई ने उसपे दिया, पानी का एक छीँटा बैठा वो दूध नीचे, समझा कि आया भाई। जिस तरह दूध-पानी, रखते थे पाक उल्फ़त अब रहें जहां में, हर एक भाई भाई!
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इक रोज़ दूध ने की पानी से पाक उल्फ़त | अज्ञात इक रोज़ दूध ने की, पानी से पाक उल्फ़तइक ज़ात हो गए वो, मिल-जुल के भाई भाईइनमें बढ़ी वो उल्फ़त, एक रंग हो गए वोएक दूसरे ने पाया, सौ जान से फ़िदाई हलवाई ने उनकी, उल्फ़त का राज़ समझा दोनों से भर के रक्खी, भट्टी पे जब कढ़ाई बरछी की तरह उट्ठे, शोले डराने वाले भाई रहे सलामत, पानी के दिल में आई ख़ामोश भाप बनकर, भाई से ली विदाई क्या पाक-दामनी थी, के जान भी गँवाई जब दूध ने ये देखा, उल्फ़त का जोश आया जब दूध ने ये देखा, उल्फ़त का जोश आया कहने लगा कहां है, वो जॉं निसार भाई अफ़सोस आग ने है, भाई मेरा जलाया मुझको न कहना भाई, जब तक न की चढ़ाई कहते ही बात इतनी, उसको जलाल आया कहते ही बात इतनी, उसको जलाल आया ऐसा उबल के झपटा, कि आग सब बुझाई हलवाई ने उसपे दिया, पानी का एक छीँटा बैठा वो दूध नीचे, समझा कि आया भाई। जिस तरह दूध-पानी, रखते थे पाक उल्फ़त अब रहें जहां में, हर एक भाई भाई!
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Ik Roz Doodh Ne Ki Pani Se Paak Ulfat | Unknown
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