EPISODE · Apr 8, 2026 · 3 MIN
Jab Milegi Roshni Mujhse Milegi | Ram Avtaar Tyagi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
जब मिलेगी रोशनी मुझसे मिलेगी । रामावतार त्यागीइस सदन में मैं अकेला ही दीया हूँ;मत बुझाओ!जब मिलेगी, रोशनी मुझसे मिलेगी!!पाँव तो मेरे थकन ने छील डालेअब विचारों के सहारे चल रहा हूँ,आँसुओं से जन्म दे-देकर हँसी कोएक मंदिर के दीये-सा जल रहा हूँ;मैं जहाँ धर दूँ क़दम, वह राजपथ है;मत मिटाओपाँव मेरे, देखकर दुनिया चलेगी!!बेबसी, मेरे अधर इतने न खोलोजो कि अपना मोल बतलाता फिरूँ मैं,इस क़दर नफ़रत न बरसाओ नयन सेप्यार को हर गाँव दफ़नाता फिरूँ मैं;एक अंगारा गर्म मैं ही बचा हूँ;मत बुझाओ!जब जलेगी, आरती मुझसे जलेगी!!जी रहे हो जिस कला का नाम लेकरकुछ पता भी है कि वह कैसे बची है,सभ्यता की जिस अटारी पर खड़े होवह हमीं बदनाम लोगों ने रची है;मैं बहारों का अकेला वंशधर हूँ,मत सुखाओ!मैं खिलूँगा, तब नई बगिया खिलेगी!!शाम ने सबके मुखों पर रात मल दीमैं जला हूँ, तो सुबह लाकर बुझूँगा,ज़िंदगी सारी गुनाहों में बिताकरजब मरूँगा, देवता बनकर पुजूँगा;आँसुओं को देखकर मेरी हँसी तुम -मत उड़ाओ!मैं न रोऊँ, तो शिला कैसे गलेगी!!
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