EPISODE · Apr 23, 2024 · 2 MIN
Jiske Sammohan Mein Pagal Dharti Hai Aakash Bhi Hai | Adam Gondvi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
जिसके सम्मोहन में पागल धरती है आकाश भी है | अदम गोंडवी | आरती जैनजिसके सम्मोहन में पागल धरती है, आकाश भी हैएक पहेली-सी दुनिया ये गल्प भी है, इतिहास भी हैचिंतन के सोपान पे चढ़कर चाँद-सितारे छू आयेलेकिन मन की गहराई में माटी की बू-बास भी हैमानवमन के द्वन्द्व को आख़िर किस साँचे में ढालोगे‘महारास’ की पृष्ठभूमि में ओशो का संन्यास भी हैइन्द्रधनुष के पुल से गुज़रकर इस बस्ती तक आए हैंजहाँ भूख की धूप सलोनी चंचल है, बिन्दास भी हैकंकरीट के इस जंगल में फूल खिले पर गंध नहींस्मृतियों की घाटी में यूँ कहने को मधुमास भी है
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