EPISODE · Apr 29, 2026 · 1 MIN
Jung | Balraj Komal
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
जंग । बलराज कोमलतीरगी में भयानक सदाएँ उठींऔर धुआँ सा फ़ज़ाओं में लहरा गयामौत की सी सपेदी उफ़ुक़-ता-उफ़ुक़तिलमिलाने लगीऔर फिर एक दमसिसकियाँ चार-सू थरथरा कर उठींएक माँ सीना-कूबी से थक कर गिरीइक बहन अपनी आँखों में आँसू लिएराह तकती रहीएक नन्हा खिलौने की उम्मीद मेंसर को दहलीज़ पर रख के सोता रहाएक मा'सूम सूरत दरीचे से सर को लगाए हुएख़्वाब बुनती रहीमुंतज़िर थीं निगाहें बड़ी देर सेमुंतज़िर ही रहींमौत की सी सपेदी उफ़ुक़-ता-उफ़ुक़तिलमिलाती रही
NOW PLAYING
Jung | Balraj Komal
No transcript for this episode yet
Similar Episodes
May 1, 2026 ·16m
Apr 29, 2026 ·46m
Apr 29, 2026 ·18m
Apr 28, 2026 ·49m