EPISODE · Oct 28, 2025 · 2 MIN
Kahan Tak Waqt Ke Dariya Ko | Shahryar
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
कहाँ तक वक़्त के दरिया को । शहरयारकहाँ तक वक़्त के दरिया को हम ठहरा हुआ देखेंये हसरत है कि इन आँखों से कुछ होता हुआ देखेंबहुत मुद्दत हुई ये आरज़ू करते हुए हम कोकभी मंज़र कहीं हम कोई अन-देखा हुआ देखेंसुकूत-ए-शाम से पहले की मंज़िल सख़्त होती हैकहो लोगों से सूरज को न यूँ ढलता हुआ देखेंहवाएँ बादबाँ खोलीं लहू-आसार बारिश होज़मीन-ए-सख़्त तुझ को फूलता-फलता हुआ देखेंधुएँ के बादलों में छुप गए उजले मकाँ सारेये चाहा था कि मंज़र शहर का बदला हुआ देखेंहमारी बे-हिसी पे रोने वाला भी नहीं कोईचलो जल्दी चलो फिर शहर को जलता हुआ देखें
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