EPISODE · Jun 4, 2024 · 2 MIN
Kalpvriksha | Damodar Khadse
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
कल्पवृक्ष | दामोदर खड़से कविताभीतर से होते हुए जब शब्दों में ढलती हैभीतरी ठिठुरनऊष्मा के स्पर्श सेप्राणवान हो उठती है ज्यों थकी हुई प्रतीक्षाबेबस प्यासदुत्कारी आशाअनायास हीकिसी पुकार को थाम लेती हैशब्द सार्थक हो उठते हैंऔर एकांत भी सान्निध्य से भर जाते हैंकविताकल्पवृक्ष है।
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Kalpvriksha | Damodar Khadse
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