EPISODE · Jul 18, 2026 · 2 MIN
Karbala | Rajesh Joshi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
कर्बला। राजेश जोशीपानी पियो तो याद करो प्यास इमाम हुसैन की!पानी पियो तो शुक्रिया अदा करो बादलों कानदियों, तालाबों और समुंदरों काशुक्रिया अदा करो समुंदरों कासमुद्रों का पानी पीने के काम न आए तो भी!पानी पियो तो शुक्रिया अदा करो कुम्हारों काजिन्होंने बनाए पृथ्वी की तरह गोल मटकेऔर बहुत सुंदर सुराहियाँ जिनकी गरदनेंसुंदर स्त्रियों की तरह पतली और लंबी हैं!पानी पियो तो सोचो।काटी तो नहीं तुमने दूसरों की नहरेंकिसी की प्यास के रास्ते में तुम यज़ीद तो नहीं?पानी पियो तो याद करो उस शख़्स कोतपते रास्तों में जिसने दियागुड़ और पानीजिसने रास्तों में बिठाईं ठंडे पानी की सबीलेंउसका शुक्रिया अदा करो!उसका भी जिसने कम से कम इच्छा कीप्याऊ लगाने की!पानी पियो तो सोचोखारा तो नहीं हुआ है तुम्हारी आत्मा का जलपानी पियो तो सोचो नन्हे अली असग़र के बारे मेंसोचो कहीं अंधे तीर में तो नहीं बदल गई हैतुम्हारी घृणा!
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कर्बला। राजेश जोशीपानी पियो तो याद करो प्यास इमाम हुसैन की!पानी पियो तो शुक्रिया अदा करो बादलों कानदियों, तालाबों और समुंदरों काशुक्रिया अदा करो समुंदरों कासमुद्रों का पानी पीने के काम न आए तो भी!पानी पियो तो शुक्रिया अदा करो कुम्हारों काजिन्होंने बनाए पृथ्वी की तरह गोल मटकेऔर बहुत सुंदर सुराहियाँ जिनकी गरदनेंसुंदर स्त्रियों की तरह पतली और लंबी हैं!पानी पियो तो सोचो।काटी तो नहीं तुमने दूसरों की नहरेंकिसी की प्यास के रास्ते में तुम यज़ीद तो नहीं?पानी पियो तो याद करो उस शख़्स कोतपते रास्तों में जिसने दियागुड़ और पानीजिसने रास्तों में बिठाईं ठंडे पानी की सबीलेंउसका शुक्रिया अदा करो!उसका भी जिसने कम से कम इच्छा कीप्याऊ लगाने की!पानी पियो तो सोचोखारा तो नहीं हुआ है तुम्हारी आत्मा का जलपानी पियो तो सोचो नन्हे अली असग़र के बारे मेंसोचो कहीं अंधे तीर में तो नहीं बदल गई हैतुम्हारी घृणा!
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