EPISODE · Jun 6, 2024 · 1 MIN
Kavita Ke Liye | Snehmayi Chaudhary
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
कविता के लिए | स्नेहमयी चौधरीकविता लिखने के लिए जो परेशान करते थे उन सबको मैंने धीरे-धीरे अपने से काट दिया। जैसे : ज़रा सी बात पर बड़ी देर तक घुमड़ते रहना, अपने किए को हर बार ग़लत समझना, निरंतर अविश्वास की झिझक ओढ़े घूमना। अब सिर ऊँचा कर स्वस्थ हो रही हूँ, मकान बनाने में जुटे मज़दूरों को देख रही हूँ।
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कविता के लिए | स्नेहमयी चौधरीकविता लिखने के लिए जो परेशान करते थे उन सबको मैंने धीरे-धीरे अपने से काट दिया। जैसे : ज़रा सी बात पर बड़ी देर तक घुमड़ते रहना, अपने किए को हर बार ग़लत समझना, निरंतर अविश्वास की झिझक ओढ़े घूमना। अब सिर ऊँचा कर स्वस्थ हो रही हूँ, मकान बनाने में जुटे मज़दूरों को देख रही हूँ।
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