EPISODE · Sep 19, 2024 · 2 MIN
Khali Ghar | Chandrakanta
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
खाली घर | चंद्रकांता सब कुछ वही थासांगोपांगघर ,कमरे,कमरे की नक्काशीदार छतनदी पर मल्लाहों की इसरार भरी पुकार सडक पर हंगामों के बीच दौड़ते- भागते बेतरतीब हुजूम के हुजूम ! और आवाज़ों के कोलाज में खड़ा खाली घर!बोधिसत्व सा,निरुद्वेग,निर्पेक्ष समयसुन रहा था उसका बेआवाज़झुनझुने की तरह बजना!देख रहा थागोद में चिपटाए दादू के झाड़फ़ानूस पापा की कद्दावार चिथड़ा तस्वीर,इधर उल्टे -सीधे खिलौनों के छितरे ढेर!उधर ताखे पर धूल-मैल से बदरंग हुईबाँह भर चूड़ियाँ काल के गह्वर में गुम हुई अल्हड़ प्रेमिका की!अनन्त दूरियों और अगम्य विस्तारों मेंकाँप रहा है बियाबान !वक्त़ के मलबे में दबा इतिहास का करुण वर्तमान!कैसा अथक इंतज़ार? बाहर के कानफाडू शोर में ढूँढ रहा हैग़ायब होती भीतर कीशब्दातीत मौलिक ध्वनियाँ !
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