EPISODE · May 3, 2025 · 4 MIN
Khana Banati Streeyan | Kumar Ambuj
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
खाना बनाती स्त्रियाँ | कुमार अम्बुजजब वे बुलबुल थीं उन्होंने खाना बनायाफिर हिरणी होकरफिर फूलों की डाली होकरजब नन्ही दूब भी झूम रही थी हवाओं के साथजब सब तरफ़ फैली हुई थी कुनकुनी धूपउन्होंने अपने सपनों को गूँधाहृदयाकाश के तारे तोड़कर डालेभीतर की कलियों का रस मिलायालेकिन आख़िर में उन्हें सुनाई दी थाली फेंकने की आवाज़आपने उन्हें सुंदर कहा तो उन्होंने खाना बनायाऔर डायन कहा तब भीउन्होंने बच्चे को गर्भ में रखकर खाना बनायाफिर बच्चे को गोद में लेकरउन्होंने अपने सपनों के ठीक बीच में खाना बनायातुम्हारे सपनों में भी वे बनाती रहीं खानापहले तन्वंगी थीं तो खाना बनायाफिर बेडौल होकरवे समुद्रों से नहाकर लौटीं तो खाना बनायासितारों को छूकर आईं तब भीउन्होंने कई बार सिर्फ़ एक आलू एक प्याज़ से खाना बनायाऔर कितनी ही बार सिर्फ़ अपने सब्र सेदुखती कमर में चढ़ते बुख़ार मेंबाहर के तूफ़ान मेंभीतर की बाढ़ में उन्होंने खाना बनायाफिर वात्सल्य में भरकरउन्होंने उमगकर खाना बनायाआपने उनसे आधी रात में खाना बनवायाबीस आदमियों का खाना बनवायाज्ञात-अज्ञात स्त्रियों का उदाहरणपेश करते हुए खाना बनवायाकई बार आँखें दिखाकरकई बार लात लगाकरऔर फिर स्त्रियोचित ठहराकरआप चीख़े—उफ़, इतना नमकऔर भूल गए उन आँसुओं कोजो ज़मीन पर गिरने से पहलेगिरते रहे तश्तरियों में, कटोरियों मेंकभी उनका पूरा सप्ताह इस ख़ुशी में गुज़र गयाकि पिछले बुधवार बिना चीख़े-चिल्लाएखा लिया गया था खानाकि परसों दो बार वाह-वाह मिलीउस अतिथि का शुक्रियाजिसने भरपेट खाया और धन्यवाद दियाऔर उसका भी जिसने अभिनय के साथ ही सहीहाथ में कौर लेते ही तारीफ़ कीवे क्लर्क हुईं, अफ़सर हुईंउन्होंने फर्राटेदार दौड़ लगाई और सितार बजायालेकिन हर बार उनके सामने रख दी गई एक ही कसौटीअब वे थकान की चट्टान पर पीस रही हैं चटनीरात की चढ़ाई पर बेल रही हैं रोटियाँउनके गले से, पीठ सेउनके अँधेरों से रिस रहा है पसीनारेले बह निकले हैं पिंडलियों तकऔर वे कह रही हैं यह रोटी लोयह गरम हैउन्हें सुबह की नींद में खाना बनाना पड़ाफिर दुपहर की नींद मेंफिर रात की नींद मेंऔर फिर नींद की नींद में उन्होंने खाना बनायाउनके तलुओं में जमा हो गया है ख़ूनझुकने लगी है रीढ़घुटनों पर दस्तक दे रहा है गठियाआपने शायद ध्यान नहीं दिया हैपिछले कई दिनों से उन्होंनेबैठकर खाना बनाना शुरू कर दिया हैहालाँकि उनसे ठीक तरह से बैठा भी नहीं जाता है।
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