EPISODE · Sep 9, 2024 · 1 MIN
Khejadi Se Ugi Ho | Nandkishore Acharya
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
खेजड़ी-सी उगी हो | नंदकिशोर आचार्य खेजड़ी-सी उगी हो मुझ मेंहरियल खेजड़ी सी तुमसूने, रेतीले विस्तार में :तुम्हीं में से फूट आया हूँताज़ी, घनी पत्तियों-सा।कभी पतझड़ की हवाएँझरा देंगी मुझेजला देंगी कभी ये सुखे की आहें!तब भी तुम रहोगीमुझे भजती हुई अपने मेंसींचता रहूँगा मैं तुम्हेंअपने गहनतम जल से।जब तलक तुम होमेरे खिलते रहने कीसभी सम्भावनाएँ हैं।
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खेजड़ी-सी उगी हो | नंदकिशोर आचार्य खेजड़ी-सी उगी हो मुझ मेंहरियल खेजड़ी सी तुमसूने, रेतीले विस्तार में :तुम्हीं में से फूट आया हूँताज़ी, घनी पत्तियों-सा।कभी पतझड़ की हवाएँझरा देंगी मुझेजला देंगी कभी ये सुखे की आहें!तब भी तुम रहोगीमुझे भजती हुई अपने मेंसींचता रहूँगा मैं तुम्हेंअपने गहनतम जल से।जब तलक तुम होमेरे खिलते रहने कीसभी सम्भावनाएँ हैं।
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