PodParley PodParley
Khudaon Se Keh Do | Kishwar Naheed

EPISODE · Jan 27, 2024 · 2 MIN

Khudaon Se Keh Do | Kishwar Naheed

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

ख़ुदाओं से कह दो | किश्वर नाहीद जिस दिन मुझे मौत आएउस दिन बारिश की वो झड़ी लगेजिसे थमना न आता हो,लोग बारिश और आँसुओं मेंतमीज़ न कर सकेंजिस दिन मुझे मौत आएइतने फूल ज़मीन पर खिलेंकि किसी और चीज़ पर नज़र न ठहर सके,चराग़ों की लवें दिए छोड़करमेरे साथ-साथ चलेंबातें करती हुईमुस्कुराती हुईजिस दिन मुझे मौत आएउस दिन सारे घोंसलों मेंसारे परिंदों के बच्चों के पर निकल आएँ,सारी सरगोशियाँ जल-तरंग लगेंऔर सारी सिसकियाँ नुक़रई ज़मज़मे बन जाएँजिस दिन मुझे मौत आएमौत मेरी इक शर्त मानकर आएपहले जीते-जी मुझसे मुलाक़ात करेमेरे घर-आँगन में मेरे साथ खेलेजीने का मतलब जानेफिर अपनी मनमानी करेजिस दिन मुझे मौत आएउस दिन सूरज ग़ुरूब होना भूल जाएकि रौशनी को मेरे साथ दफ़्न नहीं होना चाहिए!                                                                                                                      अर्थ :सरगोशियाँ- चुपके चुपके बातें करना, कानाफूसी नुक़रई- चाँदी-जैसा उज्ज्वल, वो चीज़ जो चाँदी से बनी होज़मज़मे- स्पंदनग़ुरूब- सूरज का डूबना

NOW PLAYING

Khudaon Se Keh Do | Kishwar Naheed

0:00 2:12

No transcript for this episode yet

We transcribe on demand. Request one and we'll notify you when it's ready — usually under 10 minutes.

URL copied to clipboard!