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Kivaad | Kumar Ambuj

EPISODE · Jul 7, 2024 · 2 MIN

Kivaad | Kumar Ambuj

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

किवाड़ | कुमार अम्बुजये सिर्फ़ किवाड़ नहीं हैं जब ये हिलते हैं माँ हिल जाती है और चौकस आँखों से देखती है—‘क्या हुआ?’ मोटी साँकल की चार कड़ियों में एक पूरी उमर और स्मृतियाँ बँधी हुई हैं जब साँकल बजती है बहुत कुछ बज जाता है घर में इन किवाड़ों पर चंदा सूरज और नाग देवता बने हैं एक विश्वास और सुरक्षा खुदी हुई है इन पर इन्हें देख कर हमें पिता की याद आती है। भैया जब इन्हेंबदलवाने का कहते हैंमाँ दहल जाती हैऔर कई रातों तक पिताउसके सपनों में आते हैंये पुराने हैं लेकिन कमज़ोर नहीं इनके दोलन में एक वज़नदारी है ये जब खुलते हैं एक पूरी दुनिया हमारी तरफ़ खुलती है जब ये नहीं होंगे घर घर नहीं रहेगा। 

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