कर्म प्रारब्ध
from Kalam (Hindi Poetry) Hosted by Dr. Sudhanshu Kumar
मै Sudhanshu Dubey, आप सभी का इस पॉडकास्ट शो में स्वागत करता हूँ। पिछला एपीसोड सुनने और हमारा उत्साहवर्धन करने के लिए आप सभी श्रोताओं को धन्यवाद । इस एपीसोड में कर्म और भाग्य के अन्तर्सम्बध को विभिन्न दैहिक अनुभूतियों के द्वारा उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। मन में मनोकामना का जन्म, कामना पूर्ण होने पर खुशी की अनुभूति और कामना पूर्ण न होने पर दुखी होना, यह मानव मन की स्वाभाविक वृत्ति है। इन्हीं सुखों और दुखों के बीच हमारा कर्म और भाग्य झूलता रहता है। प्रस्तुत कविता में मानव मन के इन्ही मनोविकारों को समेटने का प्रयास किया गया है। पूरा एपीसोड जरूर सुनें । आशा है ये एपीसोड भी आप सभी को पसन्द आयेगा और पुनः आप हमारा उत्साहवर्धन करेंगे। कर्म प्रारब्ध
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