EPISODE · Apr 29, 2026 · 22 MIN
।। 'करना', 'होना', 'है' ।।
from Gurudev Ojaswi Sharma Ji · host Seeker_Who Am I
*जब तक करना होता है, तब तक अहंकार की प्रधानता होती है * फिर यह प्रतीत होता है की सब हो रहा है * जिसमें परिवर्तन होता है,जैसे कि संसार में,वह वास्तव में होता नहीं, परिवर्तनशील को देखने के लिए उसका आधार अपरिवर्तनशील होना चाहिए, वह जो अपरिवर्तनशील है वह ही है जो वास्तव में ' है ' * भगवत गीता के 13 अध्याय के 2 श्लोक में भगवान ने कह दिया है क्षेत्र क्षेत्रगया का जो ज्ञान है यही सही में ज्ञान है और इस ज्ञान को जानकर हम मुक्त हो जाते हैं * गलत मानयाता से बंधन था सही मानयाता से मुक्ति हो जाती है * प्रेम का अंत नहीं आता वह बढ़ता ही चला जाता है * ज्ञान पूर्वक कर्तव्य करो इतनी सी बात कुल है * तुम तो अपने को भगवान के कार्य का निमित्त मात्र मान लो ।" मैंने किया " यह निकल जाए * भगवान तुम्हारी बुद्धि के पकड़ में नहीं आ सकते * ना तो समस्या ग्रंथ की ना आत्मा को समस्या ना ब्रह्मा को, समस्या केवल तुम्हें है कि तुम बेचैन हो
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।। 'करना', 'होना', 'है' ।।
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