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PODCAST · religion

Gurudev Ojaswi Sharma Ji

by Seeker_Who Am I

This Podcast is a tribute to our most respected Gurudev Shri Ojaswi Sharma ji and his teaching. All material on this podcast has been adapted by seekers from original recordings of Satsangs and letters of Gurudev Shri Ojaswi Sharma. Gurudev himself has never been interested in publishing any of his talks or in publicity of any kind. However, his seekers feel the need to preserve his wisdom for themselves and others. Many questions that arise concerning the spiritual path are common to all seekers. For this reason Gurudev's talks on these topics may be an inspiration to many people.

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Episodes

  1. ।। बार-बार पुकारो ।।

    * स्वामी रामसुखदास जी का लेख - भगवान को वही भक्त प्यारा लगता है जिसका कोई दूसरा सहारा नहीं है इसलिए केवल भगवान के आश्रित रहे और भजन करें परमात्मा की प्राप्ति ऐसे है जैसे बालक अपनी मां के गोद में जाए भगवान की प्रति हमारी योग्यता से नहीं होती वह अपनी कृपा से ही अपना प्रेम दे देते हैं भक्त सच्चे…

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  2. ।। अपना मान लो भगवान को ।।

    * अपना मान रखा है संसार और भजन कर रहे हैं भगवान का, कुछ नहीं होने वाला ! * भगवान को नौकर बना रखा है, मेरा काम चमकाओ, बिजनेस बढ़ाओ * जिसको अपना माना, उस में प्रेम हो जाता है * भगवान की प्राप्ति के लिए घर छोड़ा, तो भगवान बिल्कुल भी मिलेंगे नहीं * जहां हो वहीं रहो जो काम मिला है वही करते रहो खाना…

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  3. ।। भगवान planning तोड़ते है ।।

    * जितना भागवत प्राप्ति के विज्ञान का प्राकट्य भारत देश में हुआ है, उतना और कही नहीं हुआ है * कीर्तन, जप, भगवान का नाम, पवित्र करता है * इस संसार में एकदम कुछ भी हो सकता है, इस लिए जल्दी से जल्दी जागरण हो जाए * शुभ कर्म भगवान की कृपा से होते है, अशुभ कर्म मानव के अहंकार से होता है * वही शिव है…

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  4. ।। अपने दोष, दूसरों के गुण ।।

    * प्रभु से प्रार्थना करो कि अपने दोष दिखाई दें * अध्यात्म का मार्ग, एक वैज्ञानिक मार्ग है * Benjamin Franklin अपने दोष लिख कर कुछ दिन बाद देखते थे कि वे कितने कम हुए * जब किसी जीवात्मा में कोई भी कामना रहेगी, जन्म होता रहेगा

  5. ।। भगवान तो प्राप्त ही है ।।

    * चित्त भोगासक्ति में लगा है, इस लिए अनुभव नहीं हो रहा * मन अपने को ठग रहा है * आप लोगों को सुनने का व्यसन पड़ गया है, करते धरते कुछ नहीं * सीखने और जानने में अंतर होता है * कितने लोगों में यह भावना है, शरीर जाता हो तो चला जय ? आसक्तियां भरी पड़ी हैं * जितनी लगन से डिग्रियां प्राप्त करी हैं, वह इस...

  6. ।। घटनाओं का रहस्य ।।

    जैसे ही कोई परमात्मा की तरफ चलना शुरू करता है, अंदर से नई नई बातें उभर कर आती है, वह सब बाहर निकलती हुई दिखती हैं ऐसी घटनाओं से अहंकार कटता है ' कर्तव्यों पर आश्रित होना छोड़ दे, कर्म कर, आश्रय मेरा ' अपना प्रयत्न, निर्भरता भगवान पर भगवान को भूले खुराफात दिखी " मैने अपने साधना में, गंदे विचार से...

  7. ।। हर काम सत्संग बना लो ।।

    * संसार का काम ना मान कर, सब काम भगवान का मान लो * सत्तचर्चा होती है अधिकतर, सत्संग तो वही होता है जिसका साथ सत के साथ हो चुका * चेष्टा करनी चाहिए कि मन के ऊपर बुद्धि का राज्य रहे * साधना में regularity का बहुत महत्व है * लगे रहो लगे रहो, नहीं तो मृत्यु के समय बड़ा पश्चाताप होगा कि यह जनम भी…

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  8. ।। भगवान का अनुभव क्यों नहीं हो रहा ! ।।

    * जो सदा से हैं, सब जगह हैं, सबके हैं, सब में है, उनका अनुभव क्यों नहीं हो रहा * जब तक उनका अनुभव नहीं होगा , चैन मिलेगा नहीं * सभी अधिकतर परिस्थिति को सुधारने में लगे हुए है, यह एक बड़ी भूल है * परिस्थिति वश में नहीं होती, मन - स्थिति हो सकती है * " तू हे, तू मेरा है, सर्वशक्तिशाली है, मुझ पर...

  9. ।। कमियों को दूर करने का उपाय ।।

    * आलस्य लोभ ईर्ष्या क्रोध आदि कमियां आसानी से नहीं जाती हैं * सूक्ष्म शरीर में इनका बड़ा गहरा स्थान होता है * बार-बार इनसे परास्त होने पर भी प्रयत्न करना नहीं छोड़ना है * प्रयत्न अपना पूरा करते हुए हमेशा भरोसा भगवान पर * ' योगी कथामृत ' किताब का एक किस्सा * सबसे पहले कमी को कमी रूप में देखो, सत्य...

  10. ।। पहले तय करो - चाहते क्या हो ।।

    * संसार की सारी घटनाएं प्रारब्ध से होंगी, उनमें मत उलझो * अपनी समस्या को समझकर फिर प्रश्न पूछें * मन अपने को धोखा देता है * भगवान का कोई भी नाम सब से अधिक जीवन को पवित्र करता है * रोज गीत पढ़ो, पूरी लगन से, गीता में सब बातों का उत्तर है। १३ अध्याय का अध्ययन करो * जप से एक protective shield बन…

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  11. GURUPURNIMA 2011

    GURUPURNIMA 2011

  12. ।। " मैं शरीर नहीं हूं " पर दृढ़ कैसे रहें ।।

    * भोग और संग्रह से जबतक नहीं हटा जाएगा तबतक बात नहीं बनेगी * अध्यात्म जानकारी की चीज नहीं है, इस से जीवन का रूपांतरण करना होता है * जिस चीज में ज्यादा आसक्ति दिखाई दे, उस पर साधना करो * " लोग क्या कहेंगे " ना सोचके, ठीक रस्ते पर चलो * Planning और प्रबंध अलग अलग बात हैं। प्रबंध तो करो, Planning…

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  13. ।। हर काम बने राम का नाम ।।

    * दुनिया के कामों को अपना मान रखा है * हर काम और राम का नाम सब एक हो जाता है * इस के लिए सब से पहले निषिद्ध काम बिल्कुल नहीं करना

  14. ।। साधना के भिन्न भिन्न तरीके ।।

    * सत्कर्म कभी नहीं रोकने और बुरा कभी करना नहीं * कुछ साधक ऐसे है जिनके सारे काम हो चुके, उनको अपना समय अधिक से अधिक भगवत भजन में लगाना चाहिए * साधना में नियमितता बहुत महत्व की बात है * दूसरा वर्ग है जो दफ्तर में या कही और काम करते है, वे यह सोचें कि सभी काम भगवान के * किसी को कभी कष्ट नहीं…

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  15. ।। प्रवचन पूरी श्रद्धा से सुनो ।।

    * जब भी किसी सत्संग में जाओ, श्रद्धा से सुनो, और जो बात समझ में न आये उसको सोचो कि बात तो ठीक ही कही गई है, अभी मेरी समझ में नही आई * जांचते रहोगे तो विकास नहीं होगा * सिर झुकाए बिना अहम समाप्त नहीं होगा * ' है ' माने परमात्मा * सारे प्रयास इस बात को गलाने के लिए है, कि मैं शरीर हूँ * जैसी जिसके...

  16. ।। मार्ग पर चलने का फायदा ही फायदा ।।

    * मूढ़ता दूर करनी है, फिर सब दीख जाएगा * पहले जीवन का उद्देश्य तय करो * आदमी के अलावा सारी प्रकृति में कोई आत्महत्या नहीं करता गुरुदेव महाराज जी के जीवन का एक किस्सा

  17. Spiritual Path : Emotions and Intellect

    Spiritual Path : Emotions and Intellect

  18. ।। दैनिक साधना का महत्व ।।

    * जो व्यक्ति दूसरे का जितना ध्यान जीवन में रख कर चलता है, वो उतना ही भगवान के निकट होता है * धर्म के दस लक्षण मनु स्मृति में * पहला लक्षण - धैर्य * दूसरा - क्षमा * तीसरा - दम * चौथा - आस्ते ( चोरी न करना ) * पांचवा - शौंच * छठा - इंद्रियों को वश में रखना * सातवां - सात्विक बुद्धि * आठवां…

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  19. ।। सब के गुरु परमात्मा।|

    * सिद्धियों में मत फंस जाना, केवल परमात्मा * इस देश की और संस्कृति की कोई सीमा नहीं है, हर क्षेत्र में हमारे पूर्वजों ने अनेक प्रयोग किये * जिस मार्ग पर चल पड़े फिर उसको पूरा आखिर तक चलो * निषेधात्मक मार्ग से अनुभव होता है, पर इस झंझट में मत पड़ो . 10 minute meditation . * सभी इच्छाओं का अंत दुख…

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  20. ।। यहां कुछ गलत नहीं है ।।

    * जीवात्मा के विकास में अनेक stages है * धीरे धीरे ये प्रकट होगा कि यहां कुछ भी गलत नहीं हो रहा है * यहां केवल भगवान ही है इस पर आना है * न्यूज में तो अधिकतर नेगेटिव बाते होती हैं * हर किसी के साथ जो हो रहा है - वह सब प्रारब्ध से है * कैसा भी प्रारब्ध आ जाए, आत्मज्ञान के घटने की संभावना हर समय है…

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  21. ।। भगवत प्राप्ति तुरंत।।

    ।। भगवत प्राप्ति तुरंत।।

  22. ।। सात्विक अहंकार ।।

    * सात्विकता के अधिक होने का प्रयास करो, परंतु सात्विक प्रधान में " मुझे ज्ञान हो गया " यह भ्रम हो जाता है * गुरु बनने की ललक बड़ी खतरनाक * सात्विकता बढ़ने पर कई सिद्धियाँ आ जाती है * तीन इच्छाएं प्रमुख होती है - करने की जानने की पाने की * त्रिगुणतीत के लिए प्रकृति के गुण प्रभावहीन हो जाते है *...

  23. ।। आधुनिक भौतिक उन्नति से दुर्गति ।।

    ।। आधुनिक भौतिक उन्नति से दुर्गति ।।

  24. ।। जो जन्मा है-उसे मरना भी पड़ेगा ।।

    * मृत्यु के समय बड़ा भारी पश्चाताप होता है * यह मानव शरीर केवल आत्मज्ञान के लिए मिला है * इस बात के लिए ही पूरे जीवन प्रयत्न * घर छोड़ कर आश्रम मत चले जाना * अपने कर्तव्य को करते हुए यह लक्ष्य प्राप्त हो जाता है * वासनाएं रुकावट डालती है, भगवत गीता से जुड़े रहने से ये हार जाएंगी * अपने दोष और दूसरो...

  25. ।। स्वास्थ्य लाभ संबंधी बात ।।

    * हमारा सत्संग All inclusive है * कोल्ड ड्रिंक्स हमारे देश में हानिकारक चीजों से बेची जा रही है * व्हाइट शुगर सफेद जहर है * भारतीय देसी गाय का दूध ही उत्तम * शरीर तो स्वस्त रहे भगवत प्राप्ति के लिए * कैंसर बढ़ता जा रहा है देश में * ऐसी बातों को बताना चाहिए आत्मकल्याण के लिए

  26. ।। सब भगवान की मर्जी से होता है ।।

    * बईमानी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए * प्रारब्ध तो तय है, परंतु, तुम्हारी नियत, तुम्हारा प्रयत्न, तुम्हारा भाव और प्रारब्ध यह आपस में टकराते हैं

  27. ।। भगवान के बारे में, स्वामी रामसुखदास जी ।।

    ।। भगवान के बारे में, स्वामी रामसुखदास जी ।।

  28. ।।सेवा की दृष्टि से कर्तव्य, भजन है।।

    कर्तव से भगवान की सेवा करो |

  29. ।। जीवन का उद्देश्य।।

    * भगवत प्राप्ति का उद्देश्य होना जीवन की सबसे महत्वपूर्ण बात है * फिर उनका स्मरण अपने आप ही बना रहेगा

  30. ।। परम प्रभु अपने ही में पायो।।

    * स्वामी रामसुखदास जी का पद, वाणी * गुरुदेव जी की वाणी

  31. ।। नए-नए कर्मों का आरंभ मत करो ।।

    * जब तक राजसिकता की प्रधानता रहती है तब तक नए-नए कर्म, और ज्यादा फायदा का उद्देश्य रखकर किए जाते हैं * जब तक नए-नए कर्मों में ही उलझोगे तो जीवन में सुलझोगे कब * जो " तुम " हो तुम तो शुद्ध ही हो, तुम्हें बस अभी समझ नहीं आ रहा कि तुम शुद्ध ही हो * जप करते रहो, वह फिर स्मरण बन जाएगा, फिर उनकी कृपा…

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  32. ।। और क्या कहूँ ।।

    * कहते कहते 50 साल से ज्यादा हो गए कहने की हद भी तो आनी चाहिए * प्रश्न : आत्मज्ञानी की क्या पहचान है * कोई नहीं पहचान सकता, क्योंकि हर एक आदमी उतना ही पहचान सकता है जितने पहचाननें कि उसमें क्षमता है, और आत्मज्ञानी का कोई बाह्य चिन्ह नहीं होता * जो ऐसा प्रदर्शन करे कि मुझे आत्मज्ञान हो गया, तो वह…

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  33. ।। गीता प्रेस के संस्थापक संत ।।

    * साधक संजीवनी की महत्ता * स्वामी रामसुखदास जी से वार्तालाप, उनके अनेक किस्से * हनुमान प्रसाद पोद्दार जी

  34. 'शरीरी उत्पन्न होकर नष्ट होने वाला नहीं '

    * भगवत गीता दूसरे अध्याय का २० वा श्लोक * उत्पन्न होकर, फिर होना, शरीरी / परम तत्व / चैतन्य तत्व के अलावा, ये दोनों बात बाकी सभी चीजों में है * शरीरी बस ' है ' , कभी पैदा नहीं होता * मनुष्य की बुद्धि इस बात स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है कि इसकी कभी शुरुआत ही नहीं है, बस ' है ' * हम भी सदा से...

  35. ।। बूंद और समुद्र ।।

    * २ अध्याय का २० वा श्लोक * आत्मा परमात्मा क्या है इसे जानने के झंझट में न पढ़ कर तुम तो राम नाम ( किसी भी भगवान ) के जप में लग जाओ * जब विकार उठें, खुशी मनाओ, वे जाने के लिए उठ रहे है! * सत का कभी अभाव नहीं , असत का कभी भाव नहीं होता। * भगवान में न्यायकारिता और दयालुता का अद्भुत मिश्रण है * भागवत...

  36. ।। ध्यान और निद्रा ।।

    * निद्रा में मन तमस में चला जाता है * ध्यान में जब वह अवस्था आती है कि कुछ भी पता नहीं, तो वह आनंद ही है * मै तो तुम्हारे लिए बैठता हु यहाँ, मेरे लिए सब अवस्थाएँ एक है * तुम मैं ही तो हूँ, मुझे तो सारा संसार अपना ही स्वरूप दिखता है * गहरी निद्रा में तुम हो मगर तुम्हें अपने होने का पता नहीं होता,...

  37. ।। सरल मार्ग ।।

    * भगवान को पाने के अनगिनत साधन है * उनमें से एक बड़ा सरल साधन है भगवान को मानो और उनकी दी हुई भागवत गीता के अनुसार चलो * भगवान तुम्हारी प्लानिंग में फिट नहीं होंगे, तुम उनकी पहले से बनाई हुई प्लानिंग में फिट हो जाओ * भिन्नता की भ्रांति है * खास बात यह है, हम तो भगवान को भूल जाते हैं वे हमें कभी...

  38. ।। चुप हो जाओ ।।

    अपने अंदर की शांति का एक बार भी थोड़ा अनुभव हो गया तो बहुत बड़ा काम बन जाएगा

  39. ।। भोजन से भजन तक ।।

    * राजसिक से सात्विक भोजन की तरफ * Naturopathy आयुर्वेद में * Food is individual भोजन व्यक्तिगत होता है * स्वाद आना और स्वाद लेना इन दोनों में अंतर है * स्वाद के लिए नहीं स्वास्थ्य के लिए भोजन करो

  40. ।। कमीयों के कारण भगवत प्राप्ति की उम्मीद नहीं छोड़नी ।।

    * कमियों से यह नहीं सोचना कि भगवत प्राप्ति कैसे होगी * भगवान तो केवल प्रेम देखते है * यह मानना गलत है कि भगवत प्राप्ति कठिन है * जब तक इंद्रियों के माध्यम से बाहर का सुख लेते रहोगे तब तक अंदर ही छुपा हुआ आनंद का अनुभव नहीं होता - यह नियम है * भागवत प्रेम का थोड़ा सा भी छीटा पड़ जाए तो यह…

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  41. ।। कमियां दूर क्यों नहीं होती ।।

    * अंदर कमी मिटानी की जलन पैदा नहीं होती * अपनी शक्ति तो पूरी लगनी है पर आश्रय भगवान का * बिना भगवान के आश्रय के अहंकार हो जाएगा * जो कमी है उसके विपरीत गुण लाने की चेष्टा करो, लोभ की जगह दान, क्रोध की जगह क्षमा, वासना की जगह प्रेम, निर्दयता के स्थान करुणा * जिसकी आयु 25 साल है वह भी कभी भी मर…

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  42. सांसारिक ज्ञान को सीखने का कोई अंत?

    * मुख्य चीज अपने अंदर की शांति और आनंद * अपनी स्थिति को देखते हुए और अपने अंदर की शांति व आनंद को बनाए रखते हुए जितना सीख सकते हो सीख लो । सीखने का परंतु कभी कोई अंत नहीं आने वाला * सहज भाव से जितना सीखा जाए सीख लो और फिर शांत रहो * मानव जीवन मिलने के पश्चात दुखी होना महा मूर्खता की बात है *…

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  43. Great Minds Of India

    Great Minds Of India

  44. || भगवान प्राप्त है - ये मान लो ||

    || भगवान प्राप्त है - ये मान लो ||

  45. ।। 'करना', 'होना', 'है' ।।

    *जब तक करना होता है, तब तक अहंकार की प्रधानता होती है * फिर यह प्रतीत होता है की सब हो रहा है * जिसमें परिवर्तन होता है,जैसे कि संसार में,वह वास्तव में होता नहीं, परिवर्तनशील को देखने के लिए उसका आधार अपरिवर्तनशील होना चाहिए, वह जो अपरिवर्तनशील है वह ही है जो वास्तव में ' है ' * भगवत गीता के 13...

  46. ।। फिर भी हम क्यों अटके हुए हैं ।।

    *मनुष्य के विकास में पहले तमस प्रधान फिर राजसिकता आती है उसके पश्चात सात्विकता आरंभ होती है * सात्विकता के बढ़ने पर एक समय पर बात समझ में आ जाती है लेकिन चैन फिर भी नहीं मिलता * बुद्धि से समझ में आ जाना और वैसा वास्तविक हो जाना इनमें अंतर है * समझ में आने के बाद वैसा बनने की कोई चेष्टा करता है…

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  47. ।। ऐसा हो ऐसा ना हो ।।

    ।। ऐसा हो ऐसा ना हो ।।

  48. ।। भगवान ने शरीर को क्षेत्र क्यों कहा ।।

    * जड़ और चेतन यह दो तत्व सारी सृष्टि में काम कर रहे हैं * क्षेत्र मतलब खेत, क्षेत्रज्ञ मतलब वह किसान जो खेत को जानता है * ज्ञान तत्व को केवल यह बोध होना है कि मैं शरीर नही हूं * शरीर रहते हुए कामना ना रहे तो अगला जन्म नहीं होगा

  49. ।। वास्तविक सफलता।।

    * भगवत प्राप्ति वास्तविक सफलता * चेतना के अलग अलग स्तर है * नास्तिक लोगों से बचने की कोशिश करनी चाहिए * जैसे वातावरण में जैसे लोगों से, पुस्तकों से संपर्क होता है, वैसे हम बनने लगते है

  50. || ध्यान (Meditation) ||

    * ध्यान लगना हर परिस्थिति में जरूरी है * ध्यान फिर इस बात में लगता है कि मरने से पहले क्या करने लायक काम है * ध्यान इस में लगाओ कि मैं कौन हु * या फिर कोई भगवान प्रिय लगे तो उनमें ध्यान * अथवा किसी मंत्र में ध्यान * मन कोई आश्रय ढूंढता है * पल्ला झाड़ सत्संग से कुछ नहीं होगा

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