क्या करें शिक्षक
from Kalam (Hindi Poetry) Hosted by Dr. Sudhanshu Kumar
आप ने यह कहावत अवश्य सुनी होगी। भइ गति साँप छछूंदर केरी। वही स्थिति आज सभी गुरुजनों की है। एक ही समय में उन्हें बच्चों को पढ़ाना है, वैक्सिनेशन करवाना है और राशन भी बटवाना है। वे कैसे कर पायेंगे इसे सोचने का समय किसी के पास नहीं है। इनमें से किसी एक काम में शिथिलता के कारण वे कामचोर समझे जाते हैं। चाहे उनका कोई व्यक्तिगत काम हो या उनके द्वारा किया गया काम हो सबकी उपेक्षा होती है। आइये इस व्यंग्य का आनंद लेते हुए विषय की गम्भीरता समझते हैं।
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