EPISODE · Jul 1, 2021 · 17 MIN
लाल हवेली लेखिका शिवानी। Lal Haveli by Sivani
from एक थी बुलबुल ,कही अनकही कहानियाँ · host Manisha kopal yadav
नमस्कार मैं मनीषा कोपल यादव कही अनकही कहानियों की श्रंखला 'एक थी बुलबुल 'में आप सब का स्वागत करती हूं Hello everyone. I am Manisha Kopal Yadav. You all are welcome to my channel 'Ek Thi Bulbul' where you can listen Hindi short stories in my voice. Please subscribe to my channel if you like my work. हिंदी उपन्यासकार, कहानीकार पद्म श्री अलंकृत शिवानी जी का वास्तविक नाम गौरा पंत था।शिवानी जी अपने किरदारों को अपने शब्दों से ऐसे सजा देती थी कि वह साक्षात हमारे सामने आकर खड़े हो जाते थे। शिवानी जी की हिंदी ,संस्कृत, गुजराती ,बंगाली, उर्दू तथा अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ थी ।शिवानी जी की एक लघु रचना मैं मुर्गा हूंँ 1951 में धर्म युग में छपी थी ।उसके बाद आई उनकी कहानी लाल हवेली और तब से जो लेखन का क्रम शुरू हुआ वह उनके जीवन के अंतिम दिनों तक चलता रहा। उन्होंने स्त्री के लगभग सभी मनोभावों और उनके अंतर्द्वंद को बहुत खूबसूरती से अपने शब्दों के माध्यम से पन्नों पर उकेरा है। इसी से उनकी रचनाओं की लोकप्रियता आज भी जारी है।
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