EPISODE · Aug 22, 2024 · 2 MIN
Ladki | Pratibha Saxena
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
लड़की | प्रतिभा सक्सेनाआती है एक लड़की,मगन-मुस्कराती,खिलखिलाकर हँसती है,सब चौंक उठते हैं -क्यों हँसी लड़की ?उसे क्या पता आगे का हाल,प्रसन्न भावनाओं में डूबी,कितनी जल्दी बड़ी हो जाती है,सारे संबंध मन से निभाती !कोई नहीं जानता,जानना चाहता भी नहींक्या चाहती है लड़कीमन की बात बोल देतो बदनाम हो जाती है लड़कीऔर एक दिनएक घर से दूसरे घर,अनजान लोगों मेंचुपचाप चली जाती है नाम-धाम, पहचान सब यहीं छोड़,एकदम गुमनाम हो जाती है लड़कीनिभाती है जीवन भरकभी इस घर, कभी उस घर देह में नई देह रचतीविदेह होती लड़कीसब-कुछ सौंप सबकोनये रूप, नये नाम सिरज,अरूप अनाम हो,झुर्रियोंदार काया ओढ़हवाओं में विलीन हो जातीकोई नही जानता,यही थीवह हँसती-खिलखिलाती,नादान सी लड़की!
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