PodParley PodParley
Ma | Mamta Kalia

EPISODE · Feb 29, 2024 · 2 MIN

Ma | Mamta Kalia

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

माँ - ममता कालिया पुराने तख़्त पर यों बैठती हैंजैसे वह हो सिंहासन बत्तीसी।हम सबउनके सामने नीची चौकियों पर टिक जाते हैंया खड़े रहते हैं अक्सर।माँ का कमराउनका साम्राज्य है।उन्हें पता है यहाँ कहाँ सौंफ की डिबिया है और कहाँ ग्रन्थ साहबकमरे में कोई चौकीदार नहीं हैपर यहाँ कुछ भीबगैर इजाज़त छूना मना है।माँ जब ख़ुश होती हैंमर्तबान से निकालकर थोड़े से मखाने दे देती हैं मुट्ठी में।हम उनके कमरे में जाते हैंस्लीपर उतार।उनकी निश्छल हँसी मेंतमाम दिन की गर्द-धूल छँट जाती है।एक समाचार हम  उन्हें सुनाते हैं अख़बार से,एक समाचार वे हमें सुनाती हैंअपने मुँह ज़ुबानी अख़बार से।उनके अख़बार में हैहमारा परिवार, पड़ोस, मुहल्ला और मुहाने की सड़क।अक्सर उनके समाचारहमारी ख़बरों से ज़्यादा सार्थक होते हैं।उनकी सूचनाएँ ज़्यादा सही और खरी।वे हर बात काएक मुकम्मल हल ढूँढना चाहती हैं।बहुत जल्द उन्हेंहमारी ख़बरें बासी और बेमज़ा लगती हैं।वे हैरान हैंकि इतना पढ़-लिखकर भीहम किस क़दर मूर्ख हैंकि दुनिया बदलने का दम भरते हैंजबकि तकियों के ग़िलाफ़ हमसे बदले नहीं जाते!

NOW PLAYING

Ma | Mamta Kalia

0:00 2:26

No transcript for this episode yet

We transcribe on demand. Request one and we'll notify you when it's ready — usually under 10 minutes.

URL copied to clipboard!