मातुः उपदेशः episode artwork

EPISODE · Aug 20, 2025 · 3 MIN

मातुः उपदेशः

from बालमोदिनी · host सम्भाषणसन्देशः

मातुः उपदेशानुसारं सुप्रसिद्धः राजा गोपीचन्दः राज्यस्य त्यागं कृत्वा गोरखनाथस्य शिष्यः जातः । प्रथमदिने एव गुरुः गोपीचन्दं भिक्षायाचनार्थं प्रेषितवान् । ततः भिक्षाटनार्थं गतवान् । सः मातुः समीपम् अपि गत्वा भिक्षाम् अयाचत । माता त्रीणि गूढवचनानि भिक्षारूपेण अवदत् - ‘सर्वदा सुरक्षिते दुर्गे तिष्ठतु । स्वादिष्टं भोजनं एव खादतु । सुखमये सुगन्धिते तल्पे एव शयनं करोतु' इति। तेषां अर्थः च - 'गुरुसन्निधिः एव सुरक्षितः दुर्गः । यदा बुभुक्षा भवति तदा एव भोजनं स्वादिष्टं भवति । अतः यदा बुभुक्षितः अस्ति तदा एव भोजनं करोतु । यदा यत्र निद्रा बाधते तदा तत्रैव शयनं करोतु' इति ।(“केन्द्रीयसंस्कृतविश्वविद्यालयस्य अष्टादशीयोजनान्तर्गततया एतासां कथानां ध्वनिप्रक्षेपणं क्रियते”)Following his mother’s advice, the renowned King Gopichand renounced his throne and became a disciple of Gorakhnath. On the first day, his guru sent him to beg for alms. During his journey, Gopichand also approached his mother for alms. Instead, she gave him three symbolic teachings: ‘Always stay in a secure fort. Eat only delicious food. Sleep in a comfortable and fragrant bed’. She then explained their deeper meaning: ‘The guru’s presence is the true fortress of safety. When one is truly hungry, even simple food tastes delicious. Sleep should come naturally, wherever the body feels at rest’. Through these lessons, she guided him toward detachment and wisdom.

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मातुः उपदेशः

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Shyambhai Y Thakar’s Podcast Shyambhai Thakar श्यामभाई ठाकर, यह नाम आज श्रीमद्भागवत, रामकथा, श्रीमद्भगवद्गीता और हिंदू धर्मग्रंथों की हिंदू परंपरा के विद्वान, प्रामाणिक, मधुरभाषी प्रवक्ता के रूप में भारत और विदेशों में हिंदू समुदाय में जाना जाने लगा है। भारतीय संस्कृति से लहलहाते ध्वज के गौरव विस्तारक पूज्यभाईश्री रमेशभाई ओझाजी द्वारा भारत की सनातनी संस्कृति को समर्पित श्री बाबडेश्वर संस्कृत महाविद्यालय, सांदीपनि विद्यानिकेतन, पोरबंदर में संस्कृत व्याकरण में आचार्य (M.A) तक शिक्षाप्राप्त श्यामभाई, श्रीमद्भागवत आदि को केवल प्रवचनका ही विषय न मानते हुए अपनी सहज दिनचर्या के रूप में श्रीमद्भागवत, गीता, रामचरितमानस, महाभारत और हाल के लेखकों के श्रेष्ठ साहित्य का अध्ययन करते रहते है। उनकी सत्संग यात्रा, जो 1999 से जारी है, भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, अफ्रीकी देशों में 165 से अधिक कथाओं और ग्रंथों के शतावधि मूल पारायणोंके रूप में विस्तृत हुई है और फैलती जा रही है। पूज्यभाईश्री की आज्ञा और आशीर्वाद से, कथावाचन के साथ साथ श्यामभाई सांदीपनि में, आज के छात्रों और भविष्य के कथाकारों को मूल श्रीमद्भागवत ग्रंथ का 2011 से अध्ययन कराते हैं, जो कि आज Jai Jai Hanuman Gosai Hubhopper हनुमान चालीसा की सैंतीसवी चौपाई “जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाई।।” में तुलसीदास जी कहते है "हे स्वामी हनुमानजी। आपकी जय हो, जय हो, जय हो। आप मुझ पर कृपालु श्री गुरुजी के समान कृपा कीजिए। तुलसीदास जी यहाँ केहना चाहते है की जीवन में और कोई योग्य गुरु न मिले तो हनुमान जी को गुरु और हनुमान चालीसा को ही मंत्र बना लीजिए। Pinaak Podcast - पिनाक पॉडकास्ट Vivek & Vidushi Sharma पिनाक पॉडकास्ट में आपका स्वागत है, यहां हम वैदिक ज्ञान की गहराई, पुराणों की समृद्धि और इतिहास को आकार देने वाली मनोरम कहानियों के माध्यम से यात्रा पर निकलते हैं। हमारा पॉडकास्ट प्राचीन ज्ञान को उजागर करने, पौराणिक ग्रंथों की कथाओं को डिकोड करने और ऐतिहासिक कहानियों के महत्व की खोज करने के लिए समर्पित है।हमसे जुड़ें क्योंकि हम वैदिक शिक्षाओं के सार में उतरते हैं, अतीत और वर्तमान दोनों में उनकी कालातीत प्रासंगिकता में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। सावधानीपूर्वक विश्लेषण के माध्यम से, हम पौराणिक कहानियों में निहित सांस्कृतिक विरासत और गहन संदेशों को उजागर करते हैं।इसके अतिरिक्त, हम ऐतिहासिक वृत्तांतों में जान फूंकते हैं, सबक और अंतर्दृष्टि निकालते हैं जो हमारी आधुनिक दुनिया में गूंजती रहती है। चाहे आप अनुभवी विद्वान हों या जिज्ञासु शिक्षार्थी, पिनाक पॉडकास्ट बौद्धिक रूप से प्रेरक सामग्री प्रदान करता है जो ज्ञान, कहानी कहने और इतिहास के संगम का जश्न मनाता है।पिनाक पॉडकास्ट देखें और अपने आप को प्राचीन ज्ञान, कालातीत कहानियों और मनोरम इतिहास की दुनिया में डुबो द खोड्या आणि इतर कथा Khodya aani itar Katha Voicemantra दिलीपराज प्रकाशन ने प्रकाशित केलेल्या व सांत्वना शुक्ल ने कथन केलेला हा पॉडकास्ट आहे शाळकरी मुलांच्या गोष्टींचा . हा पॉडकास्ट योगेश सोमण यांच्या खोड्या आणि इतर कथा या पुस्तकावर आधारित आहे यात खोडकर मुलांच्या गमतीदार गोष्टी आहेत .पिंट्या , झिपऱ्या ,चिन्या,रघ्या, बाप्पा, ढब्ब्या ,गुड्डी यांच्या उपदव्यापी गॅंग मधले सगळेजण दिवसभरात काही न काही खोड्या करत असतात . या कथांमधून त्यांच्या निरागस खोड्यांचे वर्णन आहे .सर्वच वयाच्या श्रोत्यांना त्या आवडतील . मुलांना करमणुकीचा तर मोठ्यांना आठवणींचा आनंद घेता येईल.

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