माया की छाया
from Kalam (Hindi Poetry) Hosted by Dr. Sudhanshu Kumar
भौतिक जगत माया की छाया है। इस छाया में जीवन के संचरण के लिए काया आधार है। काया के पोषण के लिए माया ने संसार सागर को पदार्थों से भर दिया। इन पदार्थों को पाने की लालसा व्यक्ति के चित्त में वृत्तियों के रूप में पैदा की। यही वृत्तियाँ हमें भौतिक जगत से जोड़ती हैं और आजीवन संसार सागर से हम कभी मुक्त नहीं हो पाते। हमारी दृष्टि में भौतिक पदार्थ माया की छाया है। व्यक्ति माया के प्रभाव से कैसे बच सकता है? आइए जानने के लिए सुनते हैं हमारी नई कविता माया की छाया।
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