EPISODE · Jun 28, 2025 · 1 MIN
Machli Boli Kavi Se | K Sachidanandan | Girdhar Rathi
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मछली बोली कवि से | के. सच्चिदानंदनअनुवाद : गिरधर राठी उपमा मुझे मत दो स्त्री की आँख कीस्त्री हूँ मैं स्वयं, पूरी, संपूर्णमुझे नहीं धरना है भेष जलपरियों कामैं नहीं ढोऊँगी नारी का भारी सिरमुझसे अँगूठी निगलवा करकरा नहीं पाओगे मछुए का इंतज़ारमैं नहीं कोई अवतारजो लाए वेद को उबार।वापस पहुँचा दो मुझे जल में तुमकच्चा ही,तड़पना पड़े न मुझे रेत मेंबनकर प्रतीक याफिर कोई रूपक।
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