EPISODE · Mar 11, 2026 · 2 MIN
Main Badha Hi Ja Raha Hun | Shivmangal Singh Suman
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ - शिवमंगल सिंह सुमन आज जो मैं इस तरह आवेश में हूँ, अनमना हूँयह न समझो मैं किसी के रक्त का प्यासा बना हूँसत्य कहता हूँ पराये पैर का काँटा कसकताभूल से चींटी कहीं दब जाए भी तो 'हाय!' करतापर जिन्होंने स्वार्थवश जीवन विषाक्त बना दिया हैकोटि-कोटि बुभुक्षितों का कौर तक, छिना लिया हैलाभ-शुभ लिखकर ज़माने का ह्रदय चूसा जिन्होंने और कल ही, बगल वाली लाश पर थूका जिन्होंनेबिलखते शिशु की व्यथा पर दृष्टि तक जिनने न फेरीयदि क्षमा कर दूँ उन्हें, धिक्कार माँ की कोख मेरीचाहता हूँ ध्वंस कर देना विषमता की कहानीहो सुलभ सबको जगत में वस्त्र, भोजन, अन्न, पानी।
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