EPISODE · Jul 19, 2025 · 2 MIN
Main Gaane Lagta | Dinesh Singh
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मैं गाने लगता | दिनेश सिंहअक्सर क्या होता मुझकोजो मन ही मन शर्माने लगतातुम रोती, मैं गाने लगतातुम घर मैं कितना खटती होकितने हिस्सों में बटती होकड़ी धूप-सी सबकी बातेंआर्द्र भूमि-सी तुम फटती होमेरा मन छल-छल करआँखों-आँखों से बतियाने लगतातुम रोती मैं गाने लगताचूल्हा-चौका रोटी-पानीसुबह-शाम की राम-कहानीदिन भर बच्चों कीचिकचिक सेपोछा करती हो पेशानीदस्तरखान सजाने वाले हाथों कोसहलाने लगतातुम रोती मैं गाने लगतातुम पर सास-ससुर का हक़ हैयह कहने में बड़ी खनक हैचुप हूँ मैं जानते हुए भीयह रिश्ता कितना बुढ़बक हैतदपि अजब परिवार रागमैं बारम्बार बजाने लगतातुम रोती मैं गाने लगता
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