EPISODE · Apr 15, 2026 · 3 MIN
Main Gadhna Chahti Hoon | Priya Johri 'Muktipriya'
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मैं गढ़ना चाहती हूँ | प्रिय जोहरी 'मुक्तिप्रिया' मैं गढ़ना चाहती हूँ एक पुरुषजो जानता होएक स्त्री होनाक्या होता है।जो जानता होगाँव छूटता है,मां-बाप का बसायाघर-संसार छूटता है,तो क्या होता है।जो जानता होकिस्त्री की कायासंसार की माया नहीं,जगत का सृजन है,हर मानस का जन्म है।जो जानता होकिसी औरत का हौसलाबनाना कोई एहसान नहीं.ईमान है उसका,सच्चे पुरुष होने काप्रमाण है उसका।जो जी सकें जीवन कोसिर्फ़एक मानव होकर,बटे बिना,किसी जेंडर की रेखा मेंदेख सकेस्त्री का समूचा संसारमर्दवादी आहम और दंभ छोड़कर।कभी दो वक्त सोचेक्यों सीता को ही अग्नि परीक्षा देनी पड़ी,क्यों द्वौपदी का ही चीर हरण होता है,क्यों किसी भी औरत के चरित्र कोबिगाड़ देना इतना आसान होता है।खिला सकेदो निवालेप्रेम और करुणा सेअपनी संतान को,कर सके घर के कामपका सके दो वक्त की रोटी.कभी जाए और जलाएं अपने तन कोचूल्हे की आंच में,काटे अपने हाथ चाकू की धार सेनिकल कर देखे कि बाज़ार में क्या-क्याकहाँ मिलता है,घर के किस कोनेडिब्बे में क्या-क्या रखा हैकिस गमले में कौन सा फूलखिलता है.कब, किस तारीख कोएकादशी का व्रत अता है।जो समझे किप्रेम का सम्मानऔर रज़ामंदी के साथ होनाकितना ज़रूरी है,जो स्त्री को कोई पब्लिक असेट नहीं मानता होजो मानता होयह दुनियास्वर्ग से सुंदर होगीजब मेरे होनेऔर मेरी माँ के होने,और मेरी बहन के होनेऔर मेरी जीवन साथी के होने मेंकोई अंतर नहीं होगा।काश, ऐसा गढ़ा पुरुष समझ पाएकि एक स्त्री होना क्या होता है,बस एक स्त्री होना क्या होता है।
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