EPISODE · May 10, 2025 · 1 MIN
Manushya | Vimal Chandra Pandey
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मनुष्य - विमल चंद्र पाण्डेय मुझे किसी की मृत्यु की कामना से बचना हैचाहे वो कोई भी होचाहे मैं कितने भी क्रोध में होऊँऔर समय कितना भी बुरा होसामने वालामेरा कॉलर पकड़ कर गालियाँ देता हुआक्यों न कर रहा हो मेरी मृत्यु का एलानमुझे उसकी मृत्यु की कामना सेबचना हैयह समय मौतों के लिए मुफ़ीद हैमनुष्यों की अकाल मौत का कोलाज़ रचता हुआफिर भीमैं मरते हुए भी अपनी मनुष्यताबचाए रखना चाहूँगाये मेरा जवाब होगा कि मैं बचाए जाने लायक़ थाकि हम बचाए जाने लायक़ थे!
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