EPISODE · Dec 1, 2024 · 3 MIN
Meri Deh Main Paon Sahi Salamat Hain | Shahanshah Alam
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मेरी देह में पाँव सही-सलामत हैं | शहंशाह आलम यह उदासी का बीमारी कामारकाट का समय हैतब भी इस उदासी कोइस बीमारी को हराता हूँमैं देखता हूँ इतनी मारकाट के बाद भीमेरी देह में मेरे पाँव सही-सलामत हैंमैं लौट आ सकता हूँ घाट किनारे सेगंगा में बह रहीं लाशों का मातम करकेमेरे दोनों हाथ साबुत हैं अब भीछू आ सकता हूँ उसके गाल कोदे सकता हूँ बूढ़े आदमी कागिर गया पुराना चश्माउस हत्यारे को मार भगा सकता हूँजो बस मारना ही चाहता है लड़की कोमेरे दोनों कान ठीक-ठाक काम कर रहे हैंझूठ बोलने वाली सत्ता की चिल्लपों के बावजूदसुन सकता हूँ दीमकों चींटियों की आवाज़ेंमेरे मुँह में जो मेरी ज़बान है वह बस मेरी हैजो बोल सकती है राजा के विरुद्ध बिना झिझकमेरा दिल मेरा दिमाग़ अब भी सोच सकता हैकि हमारे राजा को बस नरसंहार पसंद है।
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