EPISODE · Oct 16, 2024 · 2 MIN
Milna Tha Itefaaq Bichadna Naseeb Tha | Anjum Rehbar
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था | अंजुम रहबरमिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब थावो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब थामैं उस को देखने को तरसती ही रह गईजिस शख़्स की हथेली पे मेरा नसीब थाबस्ती के सारे लोग ही आतिश-परस्त थेघर जल रहा था और समुंदर क़रीब थामरियम कहाँ तलाश करे अपने ख़ून कोहर शख़्स के गले में निशान-ए-सलीब थादफ़ना दिया गया मुझे चाँदी की क़ब्र मेंमैं जिस को चाहती थी वो लड़का ग़रीब था
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