EPISODE · Dec 16, 2024 · 2 MIN
Mit Mit Kar Main Seekh Raha Hun | Kedarnath Agarwal
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
मिट मिट कर मैं सीख रहा हूँ | केदारनाथ अग्रवालदूर कटा कविमैं जनता का,कच-कच करताकचर रहा हूँ अपनी माटी;मिट-मिट करमैं सीख रहा हूँ प्रतिपल जीने की परिपाटीकानूनी करतब से माराजितना जीता उतना हारान्याय-नेह सब समय खा गयाभीतर बाहर धुआँ छा गयाधन भी पैदा नहीं कर सकापेट-खलीसा नहीं भर सकालूट खसोट जहाँ होती है मेरी ताव वहाँ खोटी हैमिली कचहरी इज़्ज़त थोपीपहना चोंगा उतरी टोपीलिये हृदय में कविता थातीमैं ताने हूँ अपनी छाती।
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