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Nadi | Kedarnath Singh

EPISODE · Dec 3, 2024 · 2 MIN

Nadi | Kedarnath Singh

from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio

नदी | केदारनाथ सिंह अगर धीरे चलोवह तुम्हें छू लेगीदौड़ो तो छूट जाएगी नदीअगर ले लो साथतो बीहड़ रास्तों में भीवह चलती चली जाएगीतुम्हारी उँगली पकड़करअगर छोड़ दोतो वहीं अँधेरे मेंकरोड़ों तारों की आँख बचाकरवह चुपके से रच लेगीएक समूची दुनियाएक छोटे-सेघोंघे मेंसच्चाई यह हैकि तुम कहीं भी रहोतुम्हें वर्ष के सबसे कठिन दिनों में भीप्यार करती है एक नदीनदी जो इस समय नहीं है हमारे आसपासपर होगी ज़रूर कहीं-न-कहींकिसी चटाईया फूलदान के नीचेचुपचाप बहती हुईकभी सुननाजब सारा शहर सो जाएतो किवाड़ों पर कान लगाधीरे-धीरे सुननाकहीं आसपासएक मादा घड़ियाल की कराह की तरहसुनाई देगी नदी!

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Nadi | Kedarnath Singh

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