EPISODE · Nov 22, 2025 · 1 MIN
Nafi | Kishwar Naheed
from Pratidin Ek Kavita · host Nayi Dhara Radio
नफ़ी | किश्वर नाहीदमैं थी आईना फ़रोश* (विक्रेता)कोह-ए-उम्मीद* (आशा का पहाड़) के दामन मेंअकेली थी ज़ियाँ* (नुक़्सान) कोशिशसुरय्या की थी हम-दोशमुझे हर रोज़ हमा-वक़्त* (हर समय) थी बस अपनी ख़बरमैं थी ख़ुद अपने में मदहोशमैं वो तन्हा थीजिसे पैर मिलाने का सलीक़ा भी न थामैं वो ख़ुद-बीं* (आत्म-मुग्ध) थीजिसे अपने हर इक रुख़ से मोहब्बत थी बहुतमैं वो ख़ुद-सर* (अवज्ञाकारी) थीजिसे हाँ के उजालों से बहुत नफ़रत थीमैं ने फिर क़त्ल किया ख़ुद कोपिया अपना लहू हँसती रहीलोग कहते हैं हँसी ऐसी सुनी तक भी नहीं
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